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Bouquet | Photo Story

कभी-कभी प्यार बहुत शोर नहीं करता…वो बस चुपचाप कहीं छूट जाता है। आज जब नज़र उस तरफ गई,
‎तो सब कुछ वैसा ही था दीवारें, खामोशी, खालीपन…‎बस एक चीज़ अलग थी।
‎नाली के किनारे रखा एक बुके।
abandoned bouquet near drain candid photography

फूल अक्सर हाथों में अच्छे लगते हैं, किसी की मुस्कान के साथ अच्छे लगते है लेकिन यहाँ, वो अकेला था। उस पल लगा—
‎किसी ने इसे बहुत सोचकर खरीदा होगा, शायद कई बार सोचा होगा क्या कहना है…
‎लेकिन हर कहानी वैसी नहीं होती जैसी हम सोचते हैं। कुछ वादे पूरे नहीं होते और जो चीज़ें गवाह होती हैं,
‎वो सबसे पहले अकेली छूट जाती हैं।
abandoned bouquet near drain emotional love story candid photography

इस अकेले बुके को देखकर दिव्य प्रकाश दुबे की किताब 'मुसाफिर कैफे' की वो बात एकदम सच लगने लगी—
‎"सबसे ज्यादा वो यादें याद आती हैं जो हम बना सकते थे।"
‎ये फूल भी उन यादों का हिस्सा बन सकते थे, जो कभी बन ही नहीं पाईं। शायद ये किसी के वादे के गवाह थे।
‎किसी की धड़कनों के, किसी की उम्मीदों के।
‎लेकिन अब…
‎बस एक किनारे रख दिए गए हैं जैसे किसी ने कहा हो, “अब इनकी जरूरत नहीं है।”
‎कितना अजीब है ना…
‎जिस चीज़ को पकड़कर हम हिम्मत जुटाते हैं, उसे छोड़ने में सबसे ज्यादा डर लगता है। कुछ बातें ऐसी होती हैं,
‎जो हर कहानी में अलग-अलग तरीके से सामने आती हैं
‎“प्यार कभी अचानक खत्म नहीं होता…
‎वो बस धीरे-धीरे अपनी जगह छोड़ देता है।” और शायद इसीलिए ये बुके यहाँ है ना पूरी तरह फेंका गया,
‎ना किसी ने वापस उठाया। बस छोड़ दिया गया बिल्कुल वैसे ही जैसे कुछ रिश्ते छोड़ दिए जाते हैं। और सच कहूँ,
‎उस बुके को देखकर ऐसा लगा कि 
कुछ यादें पूरी नहीं होतीं…
बस अधूरी रहकर ही सबसे ज्यादा याद आती हैं।

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